अब जियो और जी लेने दो - Poetry by Ashutosh
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अब जियो और जी लेने दो

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कुछ पल की हमें फुरसत दे दो
पल भर कुछ सांसो कुछ सांसे ले लेने दो
अब जियो और जी लेने दो

तन से सुकून की तन्हाई में रहने दो
तन्हा दिल था मेरा फुरसत में थोड़ा अंगराई तो ले लेने दो

बात कुछ नही कही वो बात कह लेने दो
अश्क बह रहे है फुरसत में थोड़ा बह लेने दो
जाने कितना दर्द समेटा है दर्द को भी दर्द में रह लेने दो
अब जियो और जी लेने दो

जिसने जुल्म नहीं सहा उसे भी जुल्म सह लेने दो
पाप का भागी नहीं बना भागीदार भी हो लेने दो
पाप का वो जुल्मी स्वाद नही चखा उसे भी थोड़ा चख लेने दो
अब जियो और जी लेने दो

हैरानी ने हैरान कर दिया
परेशानी ने परेशान कर दिया
क्या हैरानी क्या परेशानी
पूछ बैठी अंदर की खुद्दारी
अब हाले दिल लेने दो
अब जियो और जी लेने दो

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