चाय की प्याली | tea poem| Poetry by Ashutosh
coffee, cup, drink
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हर रोज़ हर किसी के दिमाग का दरवाजा खटखटाती
आदत में शामिल हो जाती
एक गरम चाय की प्याली

लोग समझ नहीं पाते
भूख उनकी मिट जाती
एक गरम चाय की प्याली

पर फिर भी लोग मांगते नहीं थकते वो पानी
अब भले ना मिले उतना पानी
जीतनी चाय की चुस्की रोज भाती

मन को तारो-ताज़ा कर जाती
एक गरम चाय की प्याली

मन तो तारो-ताज़ा हो जाता
हर रोज ताज़गी ले आती
उसके साथ दिन भर की सुस्ती भी लाती
एक गरम चाय की प्याली

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