Poetry by Ashutosh - Page 4 of 5 - Great poem Great learner

-वर्ड इकोनॉमिक फोरम यानी विश्व आर्थिक मंच 1971 में शुरू हुआ था। इसका मुख्यालय स्विटज़रलैंड में है।

-ये संस्था दुनिया के हालात में सुधार लाने के लिये प्रतिबद्ध है। ये फोरम खुद को पब्लिक-प्राइवेट कोआपरेशन यानी सरकार और निजी छेत्र की भागीदारी का अंतरास्ट्रीय संगठन बताता है।

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कच्ची डोरियों,डोरियों,डोरियों से
मैनु तू बांध ले
पक्की यारियों यारियों यारियों में
होंदे ना फासले
ये नाराजगी कागजी सारी तेरी
मेरे सोरेया सुन ले मेरी
दिल दियां गल्लां
करांगे नाल नाल बह के
अक्ख नाले अक्ख नू मिला के

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goal setting, goal, dart

लच्छ रहे निर्धारित मेरे
साछय बनकर खड़े सामने
परिस्थिति कुछ ऐसी बन बैठी
स्थिति कुछ ऐसी बन बैठी

लछ्य की अब वो स्थिति है
परिस्थिति कुछ ऐसी है

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जिंदगी कल हो जाएगी हमसे दूर
क्यों न आज में जियो भरपूर
फिर मौका ए दस्तूर नहीं पायेंगे
हो जायेगा समय फितूर

कल का नहीं पता क्या होगा
क्यों सोच के आज रहें परेशान भरपूर
जिंदगी….

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cold, winter, sun

सूरज की वो रोशनी धुप दिखाती जाती है
पर ठण्ड के कोहरे की मात वो भी खाती है।
लेकिन फिर भी हराती है कोहरे को
हर पल हराती जाती है
हर रोज सूरज उगता है
पर कोहरे के लपटों के कारण किसी को नहीं वो दिखता है।
फिर भी वो उगता है और
खुद से आशा करता है।
एक दिन दिखेगा वो उस वन में
जिसमे प्रयास उसके उगने के सफल हो जाते

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हौसला है तुम्हारे पास
हौसला है हमारे पास
हम इसे बुलंद करें
तो आगे बड़ेगी हमारी आस
इतना अगर करें काम
तो समझलेना
सफलता है हमारे पास

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running, moscow, the kremlin

हौसलों में है दम

तो कुछ कर लेंगे हम।

चाहे कोई भी परिस्थिति आये

हर परिस्थिति से लड़ लेंगे हम।

होगा कभी गम

तो उसमे भी खुशिया ढूढ लेंगे हम। 

वो जिंदगी जो चाहे जी लेंगे हम 

वो जिंदगी जो चाहे जी लेंगे हम। 

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उम्मीद की किरण नजर आती नहीं

जब रास्ता कोई दिखलाता नहीं।

पीछे छूट गया  जो रास्ता

उसे  पीछे मुड़कर देखा जाता नहीं।

आता नहीं है मुझको कुछ भी

फिर भी पथ पर आगे  बढ़ता रहता

कभी न रुकता चलता रहता।

क्या रखा है भूतकाल  मे

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