Panno-ko-bhi-bolne-do| Motivational Poem| Poetry by Ashutosh

POEM

कब तक मुँह से बोलते हो

daisies, book, read
पन्नो को भी बोलने दो।
तह कर रखी पन्नो की पुरिया को तो खोलने दो
टटोलने दो उनके मन को टटोलने दो।
राज उनके भी खुल जायेंगे
जो अन्दर ही अन्दर बोलते हो
बोलने दो उन पन्नो को जो पन्ने विराने हो
वीरानी दुनिया में जाकर के अन्दर तक टटोलने दो
टटोलने दो उनके मन…
कोई न कोई कहानी तो जरूर होगी
मन ही मन में सजा के रखी होगी
कही न कही से निकल कर जुंबा पे आ जाएगी बात जो तुम चाहते हो
टटोला है जिसके मन को और अब टटोलने दो।
किताबे उनकी खुल जाती हो
जिंदगी के हर पहलु को बंया कर जाती हो
बंया की गई बाते अब तो लिख लेने दो
लिख लेने दो उन पन्नो पे और पन्नो को भी बोलने दो
जिंदगी के हर पहलु से बातो को टटोलने दो।
कब तक मुँह से बोलते हो
पन्नो को भी थोड़ा बोलने दो
बोलने दो उन पन्नो को जो पन्ने वीराने हो
इतिहास फिर से दोहराएंगे
बाते हजार कह जायेंगे
तैयार हो जाओ उन्हें लिखने को
ऐसा कुछ लिख दो अब नया इतिहास लिख दो
वो पन्ने भी खुश हो जाये
जो पन्ने गुम सुम हो
आज उनको भी बोलने दो
जो पन्ने गुम सुम हो
कब तक….

daisies, book, read

KUB TAK MUH SE BOLTE HO

Kub Tak Muh Se Bolte Ho

Panno Ko Bhi Bolne Do

Raj Unake Bhi Khul Jayenge

Jo Ander h Ander Bolte Ho

Bolne Do Un Panno Ko Jo Panne Virane Ho

Virani Duniya Me Jakar Ander Tak Tatolne Do

Tatolne Do Unke Mun Ko Tatolne do.

Koi N Koi Kahani To Jarur Hogi

Mun H Mun Me Saja Ke Rakhi Hogi

Kahi N kahi Se Nikal Kar Junba Pe aa Jayegi Bat

Jo Tum Chahate Ho

Tatola Hai Jisake Mun Ko Aur Ab Tatolne Do

Kitabe Unki Khul Jaty Ho

Jindagi Ke Her Pahalu Ko Baya Kar Jaty Ho

Baya Ki Gayi Bate Ab To Likh Lene Do

Likh Line Do Un Panno Pe Aur Panno Ko Bhi Bolne Do

Jindagi Ke Her Pahalu Se Bato Ko Tatolne Do

Kub Tak Muh Se Bolte Ho

Panno Ko Bhi Thora Bolne Do

Bolne Do Un Panno Ko Jo Panne Virane Ho

Itihas Phir Se Dohrayenge

Bate Hajar Kah Jayenge

Taiyar Ho Jao Unhe Likhane Ko

Asa Kuch Likh Do Ab Naya Itihas Likh Do

Wo Panne Bhi Khush Ho Jaye

Jo Panne Gum Sum Ho

Aj Unko Bhi Bolne Do

Jo panne gum sum ho

kub tak…