लछ्य | MOTIVATIONAL POEM | POETRY BY ASHUTOSH

लछ्य

goal setting, goal, dart

लच्छ रहे निर्धारित मेरे
साछय बनकर खड़े सामने
परिस्थिति कुछ ऐसी बन बैठी
स्थिति कुछ ऐसी बन बैठी

लछ्य की अब वो स्थिति है
परिस्थिति कुछ ऐसी है

लछ्य पूरा करू या न करू
स्थिति बड़ी असमंजस है
रास्ते भले अलग हो जाये
स्थिति भले ठीक ना हो पाये

वो समय आता है परिस्थिति आती है
जब स्थिति बदल जाती है
उस स्थिति में भी सपने जब जिंदगी में उतर आते है
हकीकत में सछ्या बनकर खड़े हो जाते है

आँखे युही धुंधला सी जाती है
जब मेहनत से हासिल मुकाम के सपने सच हो जाते है
लोगो की जुंबा पे ताले जुड़ जाते है
वो कभी होते थे अविश्वासो के अँधेरे
जो अब हो गये विश्वासों के सवेरे
खुद के भी बन जाते विश्वासों के ढेरे
लछ्य रहे निर्धारित मेरे
साछय बन कर ….