पेड़ों के बीच सवारी, साइकिल की खुशबू लाई।

हवा में आज स्वच्छता की, सभी मनोहारी लाई।

पहियों की ध्वनि बज रही, हृदय को सुरीला कर रही।

मस्ती भरी इसकी चाल में, दिल को सुखद अनुभव कर रही।

प्रकृति की गोद में चक्रवाती, दौड़ती साइकिल की रेखा।

खुद को छोड़कर जाती हैं, मन को शांति और सुख देखा।

Odisha train accident par hindi kavita

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