-
DAYS
-
HOURS
-
MINUTES
-
SECONDS

THIS YEAR 2024 READ MORE WEB STORY

children, children playing, children's
children, kids, childhood
best poem for kids

डगर उमर की कैसी थी ?
नटखट बचपन,चंचल यौवन,दुःखी बुढ़ापे जैसी थी।

कुछ मिलता, कुछ खो जाता है,
जगे कोई, कोई सो जाता है,
छीन अगर लेता है कुछ युग,
जीवन कुछ तो दे जाता है।
जीत-हार के जैसी थी।
नटखट बचपन,चंचल यौवन,दुःखी बुढ़ापे जैसी थी।

स्वर्णिम कुंदन,हरित वो सावन,
दुःखी मृत्यु आनन्दित जीवन,
जगी सुबह,अलसायी निंदिया,
कृष्ण अंधेरा, उजली पूनम,
धूप छाव के जैसी थी।
नटखट बचपन,चंचल यौवन,दुःखी बुढ़ापे जैसी थी।

बनते कुछ रिश्ते अनजाने,
अपने बन जाते बेगाने,
आँख चुराते दुःख के दिन में,
ऐसे भी हैं बड़े घराने।
दूर-पास के जैसी थी।
नटखट बचपन,चंचल यौवन,दुःखी बुढ़ापे जैसी थी।

Related Posts

  • Sign Up
Lost your password? Please enter your username or email address. You will receive a link to create a new password via email.
Exit mobile version