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yoga day 2022

International Yoga Day 2022 योग दिवस 2015 से हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हर साल 21 जून को मनाने की पहल की है| 21 जून साल का सबसे बड़ा दिन होता है| इस दिन राते छोटी होती है और दिन बड़ा होता है| इस दिन के बाद धीरे दिन छोटा होता है|

इस दौड़-भाग भरी जिंदगी में जिस तरह से हम भाग रहे है उसी तरह हमारा पीछा तमाम तरह की बीमारियां भी कर रही है और इस भागती हुई जिंदगी के साथ बिमारियों से पीछा छुड़ाना है तो अपना ध्यान खुद रखना पड़ेगा और स्वस्थ्य रहने के लिए नियमित योग करना पड़ेगा|

क्या आप जानते है? योग करने से आपको सीधे तौर पर क्या लाभ हो सकता है|


एक लाभ यह होगा आपको रासायनिक दवाओं से छुटकारा मिल जायेगा और मन शांत व प्रसन्न, शरीर स्वस्थ्य रहेगा|

आइये जानते है योग दिवस के अवसर पर ऐसे कौन-कौन से आसन है

खड़े होकर किये जाने वाले आसन एवं उनके लाभ

ताड़ासन

TADASAN

विधि

1-सीधे खड़े होते है| दोनों पैरो में लगभग अपने ही कंधो के बराबर दूरी बनाते है|
2-गहरी साँस भरते हुए,दोनों हाथों की हथेलियों को पूरा खोलकर तथा कोहनियों से सीधा रखते हुए पूरा ऊपर उठाते हैं|
3-फिर पंजो पर खड़े होते हुए,पुरे शरीर को तानते हुए,पूरा भार पंजो पर ही डालते है| इसमें सामान्य साँस चलती रहेगी तथा आंख खुली रहेगी| जितनी देर हो सके इसी अवस्था में रहना है|
4-फिर पूरा सांसो को छोड़ते हुए हाथों को नीचे लाते है,पुरे पैरो को भूमि पर टीकाकार पूर्वावस्था में आ जाते है|

लाभ

किशोरों के शरीर की ऊंचाई बढ़ती है| शरीर का सम्पूर्ण विकास होता है| एकाग्रता बढ़ती है|

तिर्यक ताड़ासन

TIRYAK TADASAN

विधि

1-श्वास को भीतर की ओर भरते हुए ताड़ासन में खड़े होकर दोनों एड़ियों को उठाते हुए पंजो के बल खड़े होना चाहिए|
2-फिर दोनों हाथो की उंगलियों को आपस में फसा लेना चाहिए|
3-श्वास को धीमे से छोड़ते हुए कमर के ऊपर वाले भाग को बायीं ओर झुकायें| फिर श्वास भरते हुए वापस सीधे खड़े हो जाये| हाथ इसी स्थिति में रहेंगे|
4-अब श्वास को धीमे से छोड़ते हुए कमर के ऊपर वाले भाग को दाहिनी ओर झुकाये| फिर श्वास भरते हुए वापस सीधे खड़े हो जाये|
5-इस प्रकार बायीं एवं दाहिनी ओर बगल में झुकते हुए 10 से 15 बार अपनी मजबूती के अनुसार दोहराये|

लाभ

उदर विकार नष्ट होते है| कब्ज दूर होता है एवं कमर के बगल की चर्बी घटती है|
मन प्रसन्न एवं स्वास्थ्य रहता है|

सावधानियां

धीमी गति से अभ्यास करना चाहिए|

गरुड़ासन

GARUDASAN

विधि

1-खड़े होकर शरीर का सारा बोझ दाहिने पैर पर डाले एवं बाये पैर को उठाते हुए मोड़कर दाहिने घुटने से लिपटाकर पीछे की ओर ले जाये|
2-बाये पैर का पंजा दाहिने पैर की एड़ी से ऊपर के भाग पर लिपटा हुआ होना चाहिए|
3-दाहिने हाथ को कोहनी से मोड़कर हथेली को चेहरे के सामने की ओर करके दूसरे हाथ कोहनी से मोड़कर इस हाथ की हथेली के भीतर की ओर मोड़ते हुए तिरछे में हाथ जोड़ ले| यह अंतिम स्थिति है| सांसे सामान्य रूप से चलती रहे और इसी अवस्था में कुछ देर रहे|
4-फिर दूसरे पैर एवं हाथ से दोहराये| इस प्रकार चार से छः बार करे|
5-धीरे-धीरे वापस पुरानी अवस्था में आ जाये|

लाभ

पैरो के जोड़ो एवं टांगो की मांसपेशियो में बल मिलता है| हाथ की पेशियाँ मजबूत होती है| सायटिका में इससे लाभ होता है| मन एकाग्र एवं स्थिर होता है|

नटराजासन

NATRAJASAN

विधि

1-अभ्यासी को सीधे खड़े हो जाना चाहिए| दाहिने घुटने को थोड़ा मोड़ते हुए बायें पैर को थोड़ा ऊपर उठाना चाहिए|
2-बायें हाथ को बायें पैर के ऊपर कुछ दूरी पर रखना चाहिए|
3-दाहिने हाथ की कोहिनी को मोड़कर बाये हाथ के ऊपर रखना चाहिए|
4-हथेलियों को आशीर्वाद मुद्रा में लाते हुए ज्ञान मुद्रा में लाना चाहिए|

लाभ

मेरुदंड एवं पैरों की मांसपेशियों की मालिश होती है| शारीरिक संतुलन की प्राप्ति होती है| सीना चौड़ा होता है एवं फेफड़े के फैलने से उनकी छमता में वृद्दि होती है|
मानसिक चंचलता में नियंत्रण एवं एकाग्रता में वृद्दि होती है|

सावधानियां

इसका अभ्यास धीरे-धीरे ही करना चाहिए| जिन्हे चक्कर आने की समस्या है उन्हें नहीं करना चाहिए| उचरक्तचाप एवं ह्रदय रोगी को नहीं करना चाहिए|

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